Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.57.20: तत्पश्चात्, अचिंत्य मन और बुद्धि वाले पृथापुत्र अर्जुन ने कृपाचार्य पर सैकड़ों बाण चलाकर उन्हें ढक लिया। अग्नि की ज्वाला के समान प्रज्वलित उन तीखे बाणों से घायल होकर कृपाचार्य अत्यन्त क्रोधित हो उठे। | mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्राच्छादयदमेयात्मा पार्थ: शरशतै: कृपम्।
स शरैरर्दित: क्रुद्ध: शितैरग्निशिखोपमै:॥ २०॥
अनुवाद
तत्पश्चात्, अचिंत्य मन और बुद्धि वाले पृथापुत्र अर्जुन ने कृपाचार्य पर सैकड़ों बाण चलाकर उन्हें ढक लिया। अग्नि की ज्वाला के समान प्रज्वलित उन तीखे बाणों से घायल होकर कृपाचार्य अत्यन्त क्रोधित हो उठे।
Thereafter, Arjuna, son of Pritha, who had an inconceivable mind and intellect, shot hundreds of arrows at Kripacharya and covered him. Kripacharya became very angry when he was hit by those sharp arrows that burned like flames of fire.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥