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mahabharat 4.57.11: जब वह शंख ध्वनि स्वर्ग से टकराकर लौटी, तब ऐसा लगा मानो इन्द्र का चलाया हुआ वज्र किसी पर्वत पर गिरा हो ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.57.11 
दिवमावृत्य शब्दस्तु निवृत्त: शुश्रुवे पुन:।
सृष्टो मघवता वज्र: प्रपतन्निव पर्वते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब वह शंख ध्वनि स्वर्ग से टकराकर लौटी, तब ऐसा लगा मानो इन्द्र का चलाया हुआ वज्र किसी पर्वत पर गिरा हो ॥11॥
 
When that sound of the conch shell struck the heaven and returned, it sounded as if the thunderbolt hurled by Indra had fallen on a mountain. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)