श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 55: अर्जुनद्वारा कौरवसेनाका संहार और उत्तरका उनके रथको कृपाचार्यके पास ले जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.55.23 
अस्यतो नित्यमत्यर्थं सर्वमेवातिगस्तथा।
अश्रुत: श्रूयते भूतैर्धनुर्घोष: किरीटिन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जब अर्जुन बाण चलाते थे, तब समस्त प्राणी उनके गाण्डीव धनुष की अद्भुत एवं तीव्र टंकार सुनते थे। ऐसी टंकार पहले किसी ने नहीं सुनी थी। अन्य सभी ध्वनियाँ उसमें डूब जाती थीं॥23॥
 
When Arjuna shot an arrow, all beings always heard the wonderful and loud twang of his Gandiva bow. No one had ever heard such a twang before. All other sounds were drowned in it.॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)