श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 52: पितामह भीष्मकी सम्मति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.52.3 
तेषां कालातिरेकेण ज्योतिषां च व्यतिक्रमात्।
पञ्चमे पञ्चमे वर्षे द्वौ मासावुपजायत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पक्ष और मास आदि के समय में वृद्धि या कमी होने तथा ग्रह-नक्षत्रों की गति में गड़बड़ी के कारण प्रत्येक पाँचवें वर्ष दो अतिरिक्त मास जुड़ जाते हैं ॥3॥
 
Due to the increase or decrease in the time of fortnights and months etc. and the disturbance in the movement of planets and stars, two extra months are added every fifth year. ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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