श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 52: पितामह भीष्मकी सम्मति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.52.19 
मत्स्यं वा पुनरायातमागतं वा शतक्रतुम्।
अहमावारयिष्यामि वेलेव मकरालयम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
फिर चाहे मत्स्यराज आये या स्वयं इन्द्र, जैसे वेला समुद्र को रोक देती है, वैसे ही मैं उन्हें आगे बढ़ने से रोक दूँगा ॥19॥
 
Then whether the King of Matsyas or Indra himself comes, just as the Vela stops the ocean, in the same manner I shall stop them from proceeding further. ॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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