श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 52: पितामह भीष्मकी सम्मति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.52.15 
दुर्योधन उवाच
नाहं राज्यं प्रदास्यामि पाण्डवानां पितामह।
युद्धोपचारिकं यत् तु तच्छीघ्रं प्रविधीयताम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा, 'किन्तु पितामह, मैं पाण्डवों को राज्य नहीं दूँगा। (अतः उनसे सन्धि नहीं हो सकती।) युद्ध में जो भी कार्य उपयोगी हो, उसे शीघ्रतापूर्वक पूरा किया जाना चाहिए।'
 
Duryodhan said, 'But, my grandfather, I will not give the kingdom to the Pandavas. (Therefore, there cannot be a treaty with them.) Whatever work is useful in the war should be completed quickly.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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