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mahabharat 4.51.13: सेना को नष्ट करने वाली सभी समस्याओं में से, बुद्धिमानों ने आंतरिक फूट को सबसे महत्वपूर्ण बताया है। विद्वानों ने इस फूट को महान पाप माना है॥13॥   |   mahabharat अध्याय 4.51: भीष्मजीके द्वारा सेनामें शान्ति और एकता बनाये रखनेकी चेष्टा तथा द्रोणाचार्यके द्वारा दुर्योधनकी रक्षाके लिये प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा सेनामें शान्ति और एकता बनाये रखनेकी चेष्टा तथा द्रोणाचार्यके द्वारा दुर्योधनकी रक्षाके लिये प्रयत्न  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.51.13 
बलस्य व्यसनानीह यान्युक्तानि मनीषिभि:।
मुख्यो भेदो हि तेषां तु पापिष्ठो विदुषां मत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सेना को नष्ट करने वाली सभी समस्याओं में से, बुद्धिमानों ने आंतरिक फूट को सबसे महत्वपूर्ण बताया है। विद्वानों ने इस फूट को महान पाप माना है॥13॥
 
Of all the problems that destroy an army, wise men have described internal divisions as the most important. Scholars have considered this division as a great sin.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)