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mahabharat 4.51.11-12: ब्रह्मास्त्र और वेद - ये दोनों वस्तुएँ गुरुजनों के सान्निध्य के अतिरिक्त अन्यत्र कहीं भी देखने को नहीं मिलतीं। हे गुरुपुत्र! मुझे क्षमा करें, यह समय हममें फूट डालने का नहीं है। हम सब मिलकर यहाँ आए हुए अर्जुन के साथ युद्ध करेंगे। ॥11-12॥   |   mahabharat अध्याय 4.51: भीष्मजीके द्वारा सेनामें शान्ति और एकता बनाये रखनेकी चेष्टा तथा द्रोणाचार्यके द्वारा दुर्योधनकी रक्षाके लिये प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा सेनामें शान्ति और एकता बनाये रखनेकी चेष्टा तथा द्रोणाचार्यके द्वारा दुर्योधनकी रक्षाके लिये प्रयत्न  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  4.51.11-12 
ब्रह्मास्त्रं चैव वेदाश्च नैतदन्यत्र दृश्यते।
आचार्यपुत्र: क्षमतां नायं कालो विभेदने॥ ११॥
सर्वे संहत्य युध्याम: पाकशासनिमागतम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मास्त्र और वेद - ये दोनों वस्तुएँ गुरुजनों के सान्निध्य के अतिरिक्त अन्यत्र कहीं भी देखने को नहीं मिलतीं। हे गुरुपुत्र! मुझे क्षमा करें, यह समय हममें फूट डालने का नहीं है। हम सब मिलकर यहाँ आए हुए अर्जुन के साथ युद्ध करेंगे। ॥11-12॥
 
Brahmastra and Vedas - these two things are not seen anywhere else except in the presence of our teachers. O son of the teacher, please forgive me, this is not the time to create divisions among us. All of us together will fight with Arjuna who has come here. ॥ 11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)