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mahabharat 4.51.10: राजन! जमदग्निपुत्र परशुराम के अतिरिक्त वेदान्त, पुराण और प्राचीन इतिहास के ज्ञान में द्रोणाचार्य से श्रेष्ठ कौन हो सकता है?॥10॥   |   mahabharat अध्याय 4.51: भीष्मजीके द्वारा सेनामें शान्ति और एकता बनाये रखनेकी चेष्टा तथा द्रोणाचार्यके द्वारा दुर्योधनकी रक्षाके लिये प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा सेनामें शान्ति और एकता बनाये रखनेकी चेष्टा तथा द्रोणाचार्यके द्वारा दुर्योधनकी रक्षाके लिये प्रयत्न  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.51.10 
वेदान्ताश्च पुराणानि इतिहासं पुरातनम्।
जामदग्न्यमृते राजन् को द्रोणादधिको भवेत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजन! जमदग्निपुत्र परशुराम के अतिरिक्त वेदान्त, पुराण और प्राचीन इतिहास के ज्ञान में द्रोणाचार्य से श्रेष्ठ कौन हो सकता है?॥10॥
 
King! Who other than Jamadagni's son Parashurama can be superior to Dronacharya in the knowledge of Vedanta, Puranas and ancient history?॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)