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mahabharat 4.5.35: तब युधिष्ठिर ने पाँचों भाइयों के गुप्त नाम क्रमशः जय, जयन्त, विजय, जयत्सेन और जयदबल रखे ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 4.5: पाण्डवोंका विराटनगरके समीप पहुँचकर श्मशानमें एक शमीवृक्षपर अपने अस्त्र-शस्त्र रखना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.5.35 
जयो जयन्तो विजयो जयत्सेनो जयद्‍बल:।
इति गुह्यानि नामानि चक्रे तेषां युधिष्ठिर:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तब युधिष्ठिर ने पाँचों भाइयों के गुप्त नाम क्रमशः जय, जयन्त, विजय, जयत्सेन और जयदबल रखे ॥35॥
 
Then Yudhishthir kept the secret names of the five brothers as Jai, Jayant, Vijay, Jayatsen and Jayadbal respectively. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)