श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 5: पाण्डवोंका विराटनगरके समीप पहुँचकर श्मशानमें एक शमीवृक्षपर अपने अस्त्र-शस्त्र रखना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.5.28 
वैशम्पायन उवाच
अथान्वशासन्नकुलं कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:।
आरुह्येमां शमीं वीर धनूंष्येतानि निक्षिप॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! तत्पश्चात कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर ने नकुल को आदेश दिया- 'वीर! तुम इस दीपक पर चढ़ जाओ और धनुष आदि इन अस्त्रों को रख लो॥28॥
 
Vaishampayanji says- Rajan! Thereafter, Kuntinandan Yudhishthir ordered Nakula - 'Brave! You climb on this lamp and keep these weapons like bow etc. 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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