vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 5: पाण्डवोंका विराटनगरके समीप पहुँचकर श्मशानमें एक शमीवृक्षपर अपने अस्त्र-शस्त्र रखना
»
श्लोक 17
श्लोक
4.5.17
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा स राजानं धर्मराजं युधिष्ठिरम्।
प्रचक्रमे निधानाय शस्त्राणां भरतर्षभ॥ १७॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! धर्मराज युधिष्ठिर से ऐसा कहकर अर्जुन ने अस्त्रों को वहीं रखने का प्रयत्न किया॥17॥
Vaishmpayana says: Janamejaya! Having said this to Dharmaraja King Yudhishthira, Arjuna began trying to keep the weapons there.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×