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श्लोक  4.5.14 
न चापि विद्यते कश्चिन्मनुष्य इति मे मति:।
योऽस्मान् निदधतो द्रष्टा भवेच्छस्त्राणि पाण्डवा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों! मेरा विश्वास है कि यहाँ कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो हमें यहाँ अपने अस्त्र-शस्त्र रखते हुए देख सके ॥14॥
 
Pāṇḍvas! I believe that there is no person here who can see us keeping our weapons here. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)