श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 5: पाण्डवोंका विराटनगरके समीप पहुँचकर श्मशानमें एक शमीवृक्षपर अपने अस्त्र-शस्त्र रखना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.5.11 
गाण्डीवं च महद् गाढं लोके च विदितं नृणाम्।
तच्चेदायुधमादाय गच्छामो नगरं वयम्।
क्षिप्रमस्मान् विजानीयुर्मनुष्या नात्र संशय:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'आपका गाण्डीव धनुष बहुत बड़ा और भारी है। यह संसार के सभी लोगों में प्रसिद्ध है। ऐसी स्थिति में यदि हम अस्त्र-शस्त्र लेकर नगर में प्रवेश करें, तो यहाँ के सभी लोग हमें शीघ्र ही पहचान लेंगे। इसमें कोई संदेह नहीं है।॥11॥
 
‘Your Gandiva bow is very big and heavy. It is famous among all the people of the world. In such a condition, if we enter the city with weapons, then everyone here will soon recognize us. There is no doubt about this.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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