श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 5: पाण्डवोंका विराटनगरके समीप पहुँचकर श्मशानमें एक शमीवृक्षपर अपने अस्त्र-शस्त्र रखना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.5.10 
सायुधाश्च प्रवेक्ष्यामो वयं तात पुरं यदि।
समुद्वेगं जनस्यास्य करिष्यामो न संशय:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री, यदि हम लोग अपने शस्त्रों सहित नगर में प्रवेश करेंगे, तो निःसंदेह यहाँ के निवासियों को आतंकित (भयभीत) कर देंगे॥10॥
 
Father, if we enter the city with our weapons, we will undoubtedly put the residents here into panic (fright).॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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