श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 5: पाण्डवोंका विराटनगरके समीप पहुँचकर श्मशानमें एक शमीवृक्षपर अपने अस्त्र-शस्त्र रखना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.5.1 
वैशम्पायन उवाच
ते वीरा बद्धनिस्त्रिंशास्तथा बद्धकलापिन:।
बद्धगोधाङ्गुलित्राणा: कालिन्दीमभितो ययु:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: हे जनमेजय, तत्पश्चात वीर पाण्डव अपनी पीठ पर तलवारें, तरकश तथा छिपकली की खाल से बने दस्ताने पहने हुए चलते हुए यमुना नदी तक पहुँचे।
 
Vaishmpayana says: O Janamejaya, thereafter the valiant Pandavas, wearing swords and quivers on their backs and gloves made of monitor lizards' skin, reached the Yamuna river while walking.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas