वैशम्पायन उवाच
ते वीरा बद्धनिस्त्रिंशास्तथा बद्धकलापिन:।
बद्धगोधाङ्गुलित्राणा: कालिन्दीमभितो ययु:॥ १॥
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: हे जनमेजय, तत्पश्चात वीर पाण्डव अपनी पीठ पर तलवारें, तरकश तथा छिपकली की खाल से बने दस्ताने पहने हुए चलते हुए यमुना नदी तक पहुँचे।
Vaishmpayana says: O Janamejaya, thereafter the valiant Pandavas, wearing swords and quivers on their backs and gloves made of monitor lizards' skin, reached the Yamuna river while walking.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥