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श्लोक 4.48.23  |
कामं गच्छन्तु कुरवो धनमादाय केवलम्।
रथेषु वापि तिष्ठन्तो युद्धं पश्यन्तु मामकम्॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| यदि कौरव चाहें तो या तो केवल गौएँ लेकर यहाँ से चले जाएँ, अथवा अपने रथों पर बैठकर अर्जुन के साथ मेरा युद्ध देखें॥ 23॥ |
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| If the Kauravas wish, they may either take only the cattle and go away from here, or remain seated on their chariots and watch my battle with Arjuna.॥ 23॥ |
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इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि उत्तरगोग्रहे कर्णविकत्थने अष्टचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें उत्तरगोग्रहके समय कर्णके आत्मप्रशंसापूर्ण वचनसम्बन्धी अड़तालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४८॥
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