श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 48: कर्णकी आत्मप्रशंसापूर्ण अहंकारोक्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.48.1 
कर्ण उवाच
सर्वानायुष्मतो भीतान् संत्रस्तानिव लक्षये।
अयुद्धमनसश्चैव सर्वांश्चैवानवस्थितान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा - मैं आप सभी वीर योद्धाओं को भयभीत और व्याकुल देख रहा हूँ। आपमें से किसी की भी युद्ध में रुचि नहीं है और आप सभी व्याकुल दिखाई दे रहे हैं।॥1॥
 
Karna said - I see all of you brave warriors scared and distressed. None of you seems to be interested in the war and all of you look restless.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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