| श्री महाभारत » पर्व 4: विराट पर्व » अध्याय 47: दुर्योधनके द्वारा युद्धका निश्चय तथा कर्णकी उक्ति » श्लोक 28 |
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| | | | श्लोक 4.47.28  | आचार्या वै कारुणिका: प्राज्ञाश्चापापदर्शिन:।
नैते महाभये प्राप्ते सम्प्रष्टव्या: कथंचन॥ २८॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘आचार्य बड़े दयालु, बुद्धिमान और पाप तथा हिंसा के विरुद्ध विचार रखने वाले होते हैं। जब महान भय की स्थिति उत्पन्न हो जाए, तब उनसे किसी प्रकार की सलाह नहीं लेनी चाहिए।॥28॥ | | | | ‘Aacharyas are very kind, intelligent and have views against sin and violence. When a situation of great fear arises, one should not ask them for any kind of advice.॥ 28॥ | | ✨ ai-generated | | |
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