श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 47: दुर्योधनके द्वारा युद्धका निश्चय तथा कर्णकी उक्ति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.47.10 
तेषां भयाभिभूतानां तदस्माभि: प्रतिश्रुतम्।
प्रथमं तैर्ग्रहीतव्यं मत्स्यानां गोधनं महत्।
सप्तम्यामपराह्णे वै तथा तैस्तु समाहितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वे अत्यन्त भयभीत थे; इसलिए हमने उनकी सहायता करने का वचन दिया था। उनसे हमारी यह वाचा थी कि सातवें दिन दोपहर को वे मत्स्यदेश (दक्षिण) की गोशाला पर आक्रमण करके वहाँ के विशाल गोवंश को अपने अधिकार में कर लें। उन्होंने ठीक वैसा ही किया॥10॥
 
They were very much overcome with fear; therefore we had pledged to help them. Our agreement with them was that on the seventh day in the afternoon they should attack the cattle farm of Matsya country (south) and take over the huge cattle there. This is exactly what they did.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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