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mahabharat 4.46.30: सूर्य का प्रकाश मंद हो गया है। भयंकर मृग और पक्षी प्रकट हो रहे हैं तथा क्षत्रियों के विनाश का संकेत देने वाले अनेक प्रकार के भयंकर उत्पात दिखाई दे रहे हैं ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 4.46: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 46: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.46.30 
ज्योतींषि न प्रकाशन्ते दारुणा मृगपक्षिण:।
उत्पाता विविधा घोरा दृश्यन्ते क्षत्रनाशना:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
सूर्य का प्रकाश मंद हो गया है। भयंकर मृग और पक्षी प्रकट हो रहे हैं तथा क्षत्रियों के विनाश का संकेत देने वाले अनेक प्रकार के भयंकर उत्पात दिखाई दे रहे हैं ॥30॥
 
The light of the Sun has dimmed. Terrible deer and birds are appearing and many types of terrible havoc indicating the destruction of the Kshatriyas are visible. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)