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श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 46: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.46.29 
भवतां रोमकूपाणि प्रहृष्टान्युपलक्षये।
ध्रुवं विनाशो युद्धेन क्षत्रियाणां प्रदृश्यते॥ २९॥
 
 
अनुवाद
कौरवों! मैं देख रहा हूँ कि तुम्हारे रोंगटे खड़े हो गये हैं; अतः इस युद्ध से क्षत्रियों का विनाश निकट प्रतीत हो रहा है।
 
Kauravas! I see that your hair has stood on end; hence, through this war, the destruction of the Kshatriyas seems to be near.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)