Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 4.46.26: हमारे सब पशु सूर्य की ओर देखकर भयंकर रूप से चिल्ला रहे हैं और कौवे रथों की ध्वजाओं में छिप रहे हैं। यह भी शुभ शकुन नहीं है॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 4.46: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 46: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.46.26 
प्रत्यादित्यं च न: सर्वे मृगा घोरप्रवादिन:।
ध्वजेषु च निलीयन्ते वायसास्तन्न शोभनम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हमारे सब पशु सूर्य की ओर देखकर भयंकर रूप से चिल्ला रहे हैं और कौवे रथों की ध्वजाओं में छिप रहे हैं। यह भी शुभ शकुन नहीं है॥ 26॥
 
All our animals look towards the sun and cry horribly and crows are hiding in the flags of the chariots. This also is not a good omen.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)