श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 46: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.46.14 
उत्तर उवाच
श्रुता मे शङ्खशब्दाश्च भेरीशब्दाश्च पुष्कला:।
कुञ्जराणां निनदतां व्यूढानीकेषु तिष्ठताम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उत्तर ने कहा - "वीर! इसमें संदेह नहीं कि मैंने अनेक बार शंख की ध्वनि सुनी है। युद्ध की तुरहियों की भयानक ध्वनि भी अनेक बार मेरे कानों में पड़ी है और मैंने सेनाओं के बीच खड़े हाथियों की चिंघाड़ भी सुनी है॥14॥
 
Uttara said, "Valiant one! There is no doubt that I have heard the sound of the conch many times. The terrifying sounds of war trumpets have also reached my ears many times and I have also heard the trumpeting of elephants standing amidst arrayed armies.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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