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mahabharat 4.46.13: फिर इस शंखनाद से तुम कैसे भयभीत हो गए? सामान्य मनुष्यों के समान अत्यधिक भय के कारण तुम्हारा रंग कैसे पीला पड़ गया?॥13॥   |   mahabharat अध्याय 4.46: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 46: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.46.13 
स त्वं कथमिहानेन शङ्खशब्देन भीषित:।
विवर्णरूपो वित्रस्त: पुरुष: प्राकृतो यथा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
फिर इस शंखनाद से तुम कैसे भयभीत हो गए? सामान्य मनुष्यों के समान अत्यधिक भय के कारण तुम्हारा रंग कैसे पीला पड़ गया?॥13॥
 
Then how did you become afraid of this blowing of the conch? How did your complexion become pale due to excessive fear like ordinary men?॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)