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अर्जुन उवाच
मा भैस्त्वं राजपुत्राग्रॺ क्षत्रियोऽसि परंतप।
कथं तु पुरुषव्याघ्र शत्रुमध्ये विषीदसि॥ ११॥
अनुवाद
अर्जुन बोले- हे शत्रुओं को सताते राजकुमार! डरो मत, तुम क्षत्रिय हो। नरसिंह! शत्रुओं के बीच में रहते हुए तुम्हें भय कैसे हो सकता है?॥11॥
Arjun said- O prince who torments the enemies! Do not be afraid, you are a Kshatriya. Man-lion! How can you be afraid when you are in the midst of the enemies?॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥