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श्लोक 4.46.11  |
अर्जुन उवाच
मा भैस्त्वं राजपुत्राग्रॺ क्षत्रियोऽसि परंतप।
कथं तु पुरुषव्याघ्र शत्रुमध्ये विषीदसि॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| अर्जुन बोले- हे शत्रुओं को सताते राजकुमार! डरो मत, तुम क्षत्रिय हो। नरसिंह! शत्रुओं के बीच में रहते हुए तुम्हें भय कैसे हो सकता है?॥11॥ |
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| Arjun said- O prince who torments the enemies! Do not be afraid, you are a Kshatriya. Man-lion! How can you be afraid when you are in the midst of the enemies?॥ 11॥ |
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