Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 4.46.10: तब कुन्तीपुत्र अर्जुन ने स्वयं लगाम खींचकर घोड़ों को खड़ा कर दिया और उत्तर को गले लगाकर उसे सांत्वना दी।   |   mahabharat अध्याय 4.46: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 46: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.46.10 
संस्थाप्य चाश्वान् कौन्तेय: समुद्यम्य च रश्मिभि:।
उत्तरं च परिष्वज्य समाश्वासयदर्जुन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तब कुन्तीपुत्र अर्जुन ने स्वयं लगाम खींचकर घोड़ों को खड़ा कर दिया और उत्तर को गले लगाकर उसे सांत्वना दी।
 
Then Arjuna, son of Kunti, himself pulled the reins and made the horses stand still, and embraced Uttar and consoled him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)