| श्री महाभारत » पर्व 4: विराट पर्व » अध्याय 44: अर्जुनका उत्तरकुमारसे अपना और अपने भाइयोंका यथार्थ परिचय देना » श्लोक 3 |
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| | | | श्लोक 4.44.3  | सर्व एव महात्मान: सर्वामित्रविनाशना:।
राज्यमक्षै: पराकीर्य न श्रूयन्ते कथंचन॥ ३॥ | | | | | | अनुवाद | | वे सब महान् पुरुष, जिन्होंने अपने समस्त शत्रुओं का नाश कर दिया था, जुए में राज्य हारकर कहाँ चले गए? जिस कारण उनका कहीं कुछ भी समाचार नहीं मिलता॥3॥ | | | | Where did all those great souls, who destroyed all their enemies, go after losing their kingdom in gambling? Due to which nothing is heard about them anywhere.॥ 3॥ | | ✨ ai-generated | | |
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