श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 44: अर्जुनका उत्तरकुमारसे अपना और अपने भाइयोंका यथार्थ परिचय देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.44.13 
अर्जुन उवाच
सर्वान् जनपदान् जित्वा वित्तमादाय केवलम्।
मध्ये धनस्य तिष्ठामि तेनाहुर्मां धनंजयम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - सम्पूर्ण देशों को जीतकर और उनसे (कर के रूप में) केवल धन लेकर मैं धन के बीच स्थित हुआ, इसीलिए लोग मुझे 'धनंजय' कहते हैं ॥13॥
 
Arjun said - Having conquered all the countries and taken only wealth from them (in the form of taxes), I was situated in the midst of wealth, that is why people call me 'Dhananjaya'. ॥13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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