vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 43: बृहन्नलाद्वारा उत्तरको पाण्डवोंके आयुधोंका परिचय कराना
»
श्लोक 7
श्लोक
4.43.7
महावीर्यं महादिव्यमेतत् तद् धनुरुत्तमम्।
एतत् पार्थमनुप्राप्तं वरुणाच्चारुदर्शनम्॥ ७॥
अनुवाद
यह श्रेष्ठ धनुष देखने में अत्यंत सुंदर है। इससे महान पराक्रम का परिचय मिलता है। अर्जुन को यह महान दिव्य धनुष स्वयं वरुण देव से प्राप्त हुआ था।
This best bow is very beautiful to look at. With this, great valour is displayed. Arjuna received this great divine bow from Varun Deva himself.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×