श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 42: उत्तरका बृहन्नलासे पाण्डवोंके अस्त्र-शस्त्रोंके विषयमें प्रश्न करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.42.18 
निर्दिशस्व यथातत्त्वं मया पृष्टा बृहन्नले।
विस्मयो मे परो जातो दृष्ट्वा सर्वमिदं महत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
बृहन्नले! मैंने जो पूछा है, उसे ठीक-ठीक बताओ। इन सब महान् अस्त्र-शस्त्रों को देखकर मैं बड़ा आश्चर्यचकित हूँ॥18॥
 
Brihannale! Tell me exactly what I have asked. I am very surprised to see all these great weapons.॥ 18॥
 
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि उत्तरवाक्यं नाम द्विचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें उत्तरवाक्यविषयक बयालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४२॥

 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas