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श्लोक 4.41.10  |
तेषां विमुच्यमानानां धनुषामर्कवर्चसाम्।
विनिश्चेरु: प्रभा दिव्या ग्रहाणामुदयेष्विव॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| जब आवरण खोले गए तो उन सूर्य के समान तेजस्वी धनुषों की प्रभा चारों ओर फैल गई, जैसे ग्रहों का दिव्य प्रकाश उदय होने पर चारों ओर फैल जाता है॥10॥ |
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| When the covers were opened the radiance of those sun-like radiant bows spread all around, just as the divine light of the planets spreads all around after they rise.॥ 10॥ |
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