श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 4: धौम्यका पाण्डवोंको राजाके यहाँ रहनेका ढंग बताना और सबका अपने-अपने अभीष्ट स्थानोंको जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.4.13 
दृष्टद्वारो लभेद् द्रष्टुं राजस्वेषु न विश्वसेत्।
तदेवासनमन्विच्छेद् यत्र नाभिपतेत् पर:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यदि तुम राजा से मिलना चाहते हो, तो पहले द्वारपाल से मिलकर राजा को सूचित करो और उनसे मिलने की अनुमति मांगो। इन राजाओं पर कभी पूरा विश्वास मत करो। अपने लिए ऐसा आसन चुनो जिस पर कोई और न बैठने वाला हो॥13॥
 
If you want to meet the king, you should first meet the gatekeeper and inform the king and ask for his permission to meet him. Never trust these kings completely. Choose a seat for yourself on which no one else is going to sit.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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