श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 39: द्रोणाचार्यद्वारा अर्जुनके अलौकिक पराक्रमकी प्रशंसा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.39.10 
नदीज लङ्केशवनारिकेतु-
र्नगाह्वयो नाम नगारिसूनु:।
एषोऽङ्गनावेषधर: किरीटी
जित्वाऽव यं नेष्यति चाद्य गा व:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'गंगापुत्र! जिनके ध्वज पर हनुमानजी विराजमान हैं, जिनका नाम वृक्ष (अर्जुन) है और जो इन्द्र के पुत्र हैं, वे मुकुटधारी धनंजय स्त्री का वेश धारण करके यहाँ आ रहे हैं। उस दुर्योधन की रक्षा करो, जिसे वह आज हराकर हमारी गौएँ वापस ले जाएगा।॥10॥
 
‘Son of Ganga! The one on whose flag Hanumanji sits, whose name is the name of a tree (Arjuna) and who is the son of Indra, that crown-wearing Dhananjay is coming here dressed as a woman. Please protect that Duryodhan whom he will defeat and take back our cows today.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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