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mahabharat 4.35.7: तब उन गौओं का रक्षक भयभीत हो गया और तुरन्त ही रथ पर बैठकर व्यथित मनुष्य की भाँति विलाप करता हुआ राजधानी की ओर चल पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 4.35: कौरवोंद्वारा उत्तर दिशाकी ओरसे आकर विराटकी गौओंका अपहरण और गोपाध्यक्षका उत्तरकुमारको युद्धके लिये उत्साह दिलाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 35: कौरवोंद्वारा उत्तर दिशाकी ओरसे आकर विराटकी गौओंका अपहरण और गोपाध्यक्षका उत्तरकुमारको युद्धके लिये उत्साह दिलाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.35.7 
गोपाध्यक्षो भयत्रस्तो रथमास्थाय सत्वर:।
जगाम नगरायैव परिक्रोशंस्तदाऽऽर्तवत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तब उन गौओं का रक्षक भयभीत हो गया और तुरन्त ही रथ पर बैठकर व्यथित मनुष्य की भाँति विलाप करता हुआ राजधानी की ओर चल पड़ा।
 
Then the protector of those cows became frightened and immediately sat on the chariot and proceeded towards the capital, wailing like a distressed person.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)