Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.35.22: वैशम्पायन कहते हैं - हे राजन! उस समय राजकुमार उत्तर के भीतरी कक्ष में स्त्रियों के बीच बैठा हुआ था। वहाँ ग्वालों के मुखिया ने उसे निर्भय करने के लिए ये उत्साहवर्धक वचन कहे। तब वह अपनी ही प्रशंसा करते हुए ऐसा कहने लगा। | mahabharat अध्याय 4.35: कौरवोंद्वारा उत्तर दिशाकी ओरसे आकर विराटकी गौओंका अपहरण और गोपाध्यक्षका उत्तरकुमारको युद्धके लिये उत्साह दिलाना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं - हे राजन! उस समय राजकुमार उत्तर के भीतरी कक्ष में स्त्रियों के बीच बैठा हुआ था। वहाँ ग्वालों के मुखिया ने उसे निर्भय करने के लिए ये उत्साहवर्धक वचन कहे। तब वह अपनी ही प्रशंसा करते हुए ऐसा कहने लगा।
Vaishampayana says - O King! At that time the prince was sitting among the women in the northern inner chamber. There the head of the cowherds said these encouraging words to make him fearless. So he started praising himself and saying this.
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि उत्तरगोग्रहे गोपवाक्ये पञ्चत्रिंशोऽध्याय:॥ ३५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें उत्तर दिशाकी गौओंके अपहरणके
प्रसंगमें गोपवचनविषयक पैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥