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mahabharat 4.33.26-28: इतना कहकर सुशर्मा अपने भाइयों के साथ उनके धनुष लेकर लौट गया। उसी समय महाबली भीमसेन ने गदा उठाकर राजा विराट के समीप भयंकर धनुषधारी रथी, हाथी सवार और घुड़सवारों सहित एक लाख शत्रु सैनिकों को क्षण भर में मार डाला तथा बहुत से पैदल सैनिकों को भी मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 4.33:   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 33:  »  श्लोक 26-28
 
 
श्लोक  4.33.26-28 
परावृत्तो धनुर्गृह्य सुशर्मा भ्रातृभि: सह।
निमेषान्तरमात्रेण भीमसेनेन ते रथा:॥ २६॥
रथानां च गजानां च वाजिनां च ससादिनाम्।
सहस्रशतसङ्घाता: शूराणामुग्रधन्विनाम्॥ २७॥
पातिता भीमसेनेन विराटस्य समीपत:।
पत्तयो निहतास्तेषां गदां गृह्य महात्मना॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इतना कहकर सुशर्मा अपने भाइयों के साथ उनके धनुष लेकर लौट गया। उसी समय महाबली भीमसेन ने गदा उठाकर राजा विराट के समीप भयंकर धनुषधारी रथी, हाथी सवार और घुड़सवारों सहित एक लाख शत्रु सैनिकों को क्षण भर में मार डाला तथा बहुत से पैदल सैनिकों को भी मार डाला।
 
Having said this, Susharma returned with his brothers, carrying their bows. Meanwhile, the great Bhimasena, taking up his mace, in a split second killed a group of one lakh enemy soldiers, including charioteers, elephant riders and horse-riders, all armed with fierce bows, near King Virata and also killed many infantry soldiers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)