Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.33.18-19: भीमसेन! ऐसा करने का साहस मत करो, इस वृक्ष को खड़ा रहने दो। यदि तुम इस महान वृक्ष को उखाड़ने का अलौकिक (मनुष्यों के लिए असंभव) कार्य करोगे, तो सब लोग पहचान जाएँगे कि यह भीम है। अतः हे भरत! तुम्हें कोई अन्य मानव-सदृश अस्त्र धारण करना चाहिए॥18-19॥ | mahabharat अध्याय 4.33: । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मा भीम साहसं कार्षीस्तिष्ठत्वेष वनस्पति:।
मा त्वां वृक्षेण कर्माणि कुर्वाणमतिमानुषम्॥ १८॥
जना: समवबुध्येरन् भीमोऽयमिति भारत।
अन्यदेवायुधं किंचित् प्रतिपद्यस्व मानुषम्॥ १९॥
अनुवाद
भीमसेन! ऐसा करने का साहस मत करो, इस वृक्ष को खड़ा रहने दो। यदि तुम इस महान वृक्ष को उखाड़ने का अलौकिक (मनुष्यों के लिए असंभव) कार्य करोगे, तो सब लोग पहचान जाएँगे कि यह भीम है। अतः हे भरत! तुम्हें कोई अन्य मानव-सदृश अस्त्र धारण करना चाहिए॥18-19॥
‘Bhimsena! Do not dare to do this, let this tree remain standing. If you perform the superhuman (impossible for humans) act of uprooting this great tree, then everyone will recognize that this is Bhima. Therefore, Bharata! You should take some other human-like weapon.॥ 18-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥