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श्लोक 4.33.13  |
उषिता: स्म सुखं सर्वे सर्वकामै: सुपूजिता:।
भीमसेन त्वया कार्या तस्य वासस्य निष्कृति:॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| हम सब लोग उनके यहाँ सुखपूर्वक रह चुके हैं और उन्होंने हमें सब प्रकार की इच्छित वस्तुएँ देकर हमारा भला किया है। अतः हे भीमसेन! आपको उनके घर में रहने का उपकार चुकाना चाहिए।॥13॥ |
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| We all have lived happily at his place and he has treated us well by giving us all kinds of desired things. Therefore, Bhimasena! You should repay the favour of staying in his house.'॥ 13॥ |
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