Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 4.32.26: दोनों रथी क्रोध में भरकर अपने रथों को पास ले आये और एक दूसरे पर तेजी से बाणों की वर्षा करने लगे, मानो दो बादल जल की धाराएँ बरसा रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 4.32: मत्स्य तथा त्रिगर्तदेशीय सेनाओंका परस्पर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 32: मत्स्य तथा त्रिगर्तदेशीय सेनाओंका परस्पर युद्ध  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.32.26 
ततो रथाभ्यां रथिनौ व्यतीयतुरमर्षणौ।
शरान् व्यसृजतां शीघ्रं तोयधारा घना इव॥ २६॥
 
 
अनुवाद
दोनों रथी क्रोध में भरकर अपने रथों को पास ले आये और एक दूसरे पर तेजी से बाणों की वर्षा करने लगे, मानो दो बादल जल की धाराएँ बरसा रहे हों।
 
Both the charioteers, filled with rage, drove their chariots closer and began showering arrows upon each other rapidly, as if two clouds were pouring down streams of water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)