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mahabharat 4.32.2: तब क्रोध से भरकर युद्ध के लिए उन्मत्त त्रिगर्त और मत्स्य के पराक्रमी योद्धा गायों को पकड़ने के लिए एक-दूसरे पर गर्जना करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 4.32: मत्स्य तथा त्रिगर्तदेशीय सेनाओंका परस्पर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 32: मत्स्य तथा त्रिगर्तदेशीय सेनाओंका परस्पर युद्ध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.32.2 
ते त्रिगर्ताश्च मत्स्याश्च संरब्धा युद्धदुर्मदा:।
अन्योन्यमभिगर्जन्तो गोषु गृद्धा महाबला:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब क्रोध से भरकर युद्ध के लिए उन्मत्त त्रिगर्त और मत्स्य के पराक्रमी योद्धा गायों को पकड़ने के लिए एक-दूसरे पर गर्जना करने लगे।
 
Then, filled with anger and mad for war, the mighty warriors of Trigarta and Matsya began roaring at one another, aiming to capture the cows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)