श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 3: नकुल, सहदेव तथा द्रौपदीद्वारा अपने-अपने भावी कर्तव्योंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  4.3.5-6 
ये मामामन्त्रयिष्यन्ति विराटनगरे जना:।
तेभ्य एवं प्रवक्ष्यामि विहरिष्याम्यहं यथा॥ ५॥
पाण्डवेन पुरा तात अश्वेष्वधिकृत: पुरा।
विराटनगरे छन्नश्चरिष्यामि महीपते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
विराटनगर में जो लोग मेरे विषय में पूछेंगे, उन्हें मैं इस प्रकार उत्तर दूँगा - ‘पिताजी! पहले पाण्डवपुत्र राजा युधिष्ठिर ने मुझे घोड़ों का प्रधान नियुक्त किया था।’ हे राजन! मैंने तुम्हें वहाँ जाने के मार्ग के विषय में सब कुछ बता दिया है। मैं राजा विराट के नगर में सर्वत्र गुप्त रहकर ही भ्रमण करूँगा।॥ 5-6॥
 
I will answer the people who will ask about me in Viratnagar in this manner-'Father, earlier King Yudhishthira, the son of Pandavas, had appointed me as the head of the horses.' O great king, I have told you everything about the way I will travel there. I will travel everywhere in the city of King Virat while keeping myself hidden.॥ 5-6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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