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mahabharat 4.3.22: युधिष्ठिर बोले—कृष्ण! तुमने अच्छी बात कही है, इसमें बहुत अच्छाई है। क्यों न हो, तुम तो उच्च कुल में जन्मी हो! भामिनी! तुम्हें पाप का लेशमात्र भी ज्ञान नहीं है। तुम पतिव्रता स्त्री हो और उत्तम व्रतों का पालन करने में सदैव तत्पर रहती हो। 22।   |   mahabharat अध्याय 4.3: नकुल, सहदेव तथा द्रौपदीद्वारा अपने-अपने भावी कर्तव्योंका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 3: नकुल, सहदेव तथा द्रौपदीद्वारा अपने-अपने भावी कर्तव्योंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.3.22 
युधिष्ठिर उवाच
कल्याणं भाषसे कृष्णे कुले जातासि भामिनि।
न पापमभिजानासि साध्वी साधुव्रते स्थिता॥ २२॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले—कृष्ण! तुमने अच्छी बात कही है, इसमें बहुत अच्छाई है। क्यों न हो, तुम तो उच्च कुल में जन्मी हो! भामिनी! तुम्हें पाप का लेशमात्र भी ज्ञान नहीं है। तुम पतिव्रता स्त्री हो और उत्तम व्रतों का पालन करने में सदैव तत्पर रहती हो। 22।
 
Yudhishthira said— Krishna! You have said a good thing, it is full of goodness. Why not, you are born in a high family! Bhaamini! You do not have even the slightest knowledge of sin. You are a virtuous lady and are always ready to follow the best fasts. 22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)