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mahabharat 4.3.2: युधिष्ठिर ने पूछा- नकुल! राजा विराट के राज्य में रहकर तुम कौन-सा कार्य करोगे? वह कार्य बताओ। पिताश्री! तुम वीर योद्धा होने के साथ-साथ अत्यंत सुकुमार, अत्यंत आकर्षक और सभी प्रकार के सुख भोगने के योग्य भी हो।   |   mahabharat अध्याय 4.3: नकुल, सहदेव तथा द्रौपदीद्वारा अपने-अपने भावी कर्तव्योंका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.3.2 
युधिष्ठिर उवाच
किं त्वं नकुल कुर्वाणस्तत्र तात चरिष्यसि।
कर्म तत् त्वं समाचक्ष्व राज्ये तस्य महीपते:।
सुकुमारश्च शूरश्च दर्शनीय: सुखोचित:॥ २॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- नकुल! राजा विराट के राज्य में रहकर तुम कौन-सा कार्य करोगे? वह कार्य बताओ। पिताश्री! तुम वीर योद्धा होने के साथ-साथ अत्यंत सुकुमार, अत्यंत आकर्षक और सभी प्रकार के सुख भोगने के योग्य भी हो।
 
Yudhishthira asked- Nakul! What work will you do while living in the kingdom of King Virat? Tell me that work. Father! Besides being a brave warrior, you are also very delicate, extremely attractive and fit for enjoying all kinds of happiness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)