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mahabharat 4.29.d2: दुर्योधन बोला, “मंत्रियो! पूर्वकाल में मैंने एक सार्वजनिक सभा में विद्वान, ज्ञानी, वीर तथा गुणवान पुरुषों के निश्चित सिद्धांतों के विषय में कुछ बातें सुनी हैं, जिनसे मैं नीति की दृष्टि से पुरुषों के बल को जानता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 4.29: कृपाचार्यकी सम्मति और दुर्योधनका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.29.d2 
दुर्योधन उवाच
श्रुतं ह्येतन्मया पूर्वं कथासु जनसंसदि।
वीराणां शास्त्रविदुषां प्राज्ञानां मतिनिश्चये॥
कृतिनां सारफल्गुत्वं जानामि नयचक्षुषा।
 
 
अनुवाद
दुर्योधन बोला, “मंत्रियो! पूर्वकाल में मैंने एक सार्वजनिक सभा में विद्वान, ज्ञानी, वीर तथा गुणवान पुरुषों के निश्चित सिद्धांतों के विषय में कुछ बातें सुनी हैं, जिनसे मैं नीति की दृष्टि से पुरुषों के बल को जानता हूँ।
 
Duryodhan said, "Ministers! In the past, I have heard some things about the fixed principles of learned, knowledgeable, brave and virtuous men in a public meeting, from which I know the strength of men from the point of view of policy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)