श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 29: कृपाचार्यकी सम्मति और दुर्योधनका निश्चय  »  श्लोक d19
 
 
श्लोक  4.29.d19 
तस्मात् कर्तव्यमेतद् वै तत्र यात्रा विधीयताम्।
एतत् सुनीतं मन्येऽहं सर्वेषां यदि रोचते॥ )
 
 
अनुवाद
अतः मत्स्य देश पर आक्रमण अवश्य करना चाहिए। वहाँ की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। यदि आप सभी को यह अच्छा लगे, तो मैं इस कार्य को नीति-सम्मत मानता हूँ।
 
Therefore, Matsya country should definitely be attacked. A trip there should definitely be undertaken. If you all like it, then I consider this action to be in accordance with policy.
 
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि चारप्रत्याचारे कृपवाक्ये एकोनत्रिंशोऽध्याय:॥ २९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें गुप्तचर भेजनेके विषयमें कृपाचार्यवचनसम्बन्धी उनतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २० श्लोक मिलाकर कुल ३४ श्लोक हैं।)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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