श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 29: कृपाचार्यकी सम्मति और दुर्योधनका निश्चय  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.29.8 
तस्माद् बलं च कोषश्च नीतिश्चापि विधीयताम्।
यथा कालोदये प्राप्ते सम्यक् तै: संदधामहे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘इसलिए इस समय तुम अपनी सेना, कोष और नीति ऐसी रखो कि समय आने पर हम लोग उनसे उचित सन्धि (बैठक या युद्ध का लक्ष्य) कर सकें।॥8॥
 
‘Therefore, at this time you should keep your army, treasury and policy such that, when the time comes, we can enter into a proper treaty (meeting or aiming at a battle) with them.॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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