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mahabharat 4.29.5-6: अतः इस समय जब महाबली पाण्डव वेश बदलकर (अर्थात वेश बदलकर) छिपे हुए हैं और उनके वनवास की निश्चित अवधि लगभग समाप्त हो गई है, तब मनुष्य को यह समझ लेना चाहिए कि अपने देश में और परदेश में अपनी कितनी शक्ति है। इसमें कोई संदेह नहीं कि उचित समय आने पर पाण्डव अवश्य प्रकट होंगे॥5-6॥   |   mahabharat अध्याय 4.29: कृपाचार्यकी सम्मति और दुर्योधनका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 29: कृपाचार्यकी सम्मति और दुर्योधनका निश्चय  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  4.29.5-6 
तस्मात् सत्रं प्रविष्टेषु पाण्डवेषु महात्मसु।
गूढभावेषु छन्नेषु काले चोदयमागते॥ ५॥
स्वराष्ट्रे परराष्ट्रे च ज्ञातव्यं बलमात्मन:।
उदय: पाण्डवानां च प्राप्ते काले न संशय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अतः इस समय जब महाबली पाण्डव वेश बदलकर (अर्थात वेश बदलकर) छिपे हुए हैं और उनके वनवास की निश्चित अवधि लगभग समाप्त हो गई है, तब मनुष्य को यह समझ लेना चाहिए कि अपने देश में और परदेश में अपनी कितनी शक्ति है। इसमें कोई संदेह नहीं कि उचित समय आने पर पाण्डव अवश्य प्रकट होंगे॥5-6॥
 
‘Therefore, at this time when the great Pandavas are hiding in disguise (i.e. by disguising themselves) and the stipulated period of their exile is almost over, one should understand how much power one has in one's own country and abroad. There is no doubt that the Pandavas will appear as soon as the right time arrives.॥ 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)