| श्री महाभारत » पर्व 4: विराट पर्व » अध्याय 29: कृपाचार्यकी सम्मति और दुर्योधनका निश्चय » श्लोक 1 |
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| | | | श्लोक 4.29.1  | वैशम्पायन उवाच
तत: शारद्वतो वाक्यमित्युवाच कृपस्तदा।
युक्तं प्राप्तं च वृद्धेन पाण्डवान् प्रति भाषितम्॥ १॥ | | | | | | अनुवाद | | वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! इसके बाद महर्षि शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य ने उस समय यह कहा - 'हे राजन! वृद्ध भीष्म ने पाण्डवों के विषय में जो कुछ कहा है, वह न केवल युक्तिसंगत है, अपितु अवसर के अनुकूल भी है।॥1॥ | | | | Vaishmpayana says - O King! After this, Kripacharya, son of Maharishi Sharadwan, said this at that time - 'O King! Whatever the aged Bhishma has said about the Pandavas is not only reasonable, but also appropriate for the occasion. ॥ 1॥ | | ✨ ai-generated | | |
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