श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिरकी महिमा कहते हुए भीष्मकी पाण्डवोंके अन्वेषणके विषयमें सम्मति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  4.28.4 
भीष्म: समवदत् तत्र गिरं साधुभिरर्चिताम्।
यश्चैष ब्राह्मण: प्राह द्रोण: सर्वार्थतत्त्ववित्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भीष्म ने उत्तम पुरुषों द्वारा प्रशंसित उचित वचन कहे - 'सम्पूर्ण विषयों के विशेषज्ञ और महान ब्राह्मण आचार्य द्रोण ने जो कहा है, वह ठीक है।॥4॥
 
Thus Bhishma spoke the right words, praised by the noble men - 'What Drona, the expert of all subjects and the great Brahmin Acharya, has said is correct. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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